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जनगणना: पहली बार इंटरनेट इंफो जुटाएगी सरकार

वसुधा वेणुगोपाल, नई दिल्ली अगले महीने जनगणना करने वाले कर्मचारी हाउसलिस्टिंग एंड हाउसिंग सेंसस में इंटरनेट और एंटरटेनमेंट से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा जुटाएंगे। यह देशव्यापी सर्वे 2021 में होने वाली जनगणना से पहले 12 अगस्त से 4 सितंबर के बीच किया जाएगा। इसमें पता लगाया जाएगा कि देश के लोगों की दिनचर्या कैसी है, वे किस फ्यूल का उपयोग करते हैं, पेयजल कैसे खरीदते हैं। यह भी जानने की कोशिश की जाएगी कि उनके पास टीवी, रेडियो या इंटरनेट कनेक्शन के साथ लैपटॉप है या नहीं। सरकार इन सबके माध्यम से स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच का अंदाजा लगाएगी। इस देशव्यापी सर्वे में लोगों से यह भी पूछा जाएगा कि वे किस ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। 2011 की जनगणना में भी इंटरनेट रहा शामिल पहली बार सरकार यह जानने की कोशिश करेगी कि देश के कितने घरों में इंटरनेट है, हर घर में कितने मोबाइल या स्मार्टफोन हैं। यह भी नोट किया जाएगा कि कितने घर एमएसओ (मल्टीपल सिस्टम ऑपरेटर्स), लोकल केबल ऑपरेटर, डीटीएच या डिश कनेक्शन के जरिए टीवी देखते हैं। सर्वे में यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या लोगों के पास परंपरागत रेडियो या ट्रांजिस्टर या फिर दोनों हैं? क्या लोग मोबाइल फोन/स्मार्टफोन का इस्तेमाल रेडियो सुनने के लिए करते हैं। सरकार ने 2011 में भी एक सवाल के जरिए इंटरनेट की पहुंच का अंदाजा लगाने की कोशिश की थी, जिसमें घर में मौजूद कंप्यूटर या लैपटॉप की संख्या के बारे में पूछा जाता था। इसका जवाब हां में मिलने के बाद पूछा जाता था कि कितने सदस्य उसका इस्तेमाल करते हैं। इसमें एक नया सवाल जोड़ा गया है, जिसके जरिए पता लगाया जाएगा कि घर में उपलब्ध कनेक्शन मोड डायल-अप, डीएसल, केबल या फिर वायरलेस है या नहीं। स्मार्टफोन को भी प्रश्नावली में जोड़ा गया है। मोबाइल-टेलीफोन को अलग-अलग गिना 2011 के सर्वे के मुताबिक, शहरी इलाकों में 20 प्रतिशत परिवारों के साथ 5 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास कंप्यूटर या लैपटॉप था। उस समय इंटरनेट कनेक्शन के साथ कंप्यूटर या लैपटॉप केवल 1 प्रतिशत ग्रामीण और 8 प्रतिशत शहरी परिवारों के पास ही था। 2011 की जनगणना ने मोबाइल और टेलीफोन को अलग-अलग गिनना शुरू किया। इसमें पता चला था कि 6 प्रतिशत परिवारों के पास मोबाइल फोन और लैंडलाइन फोन दोनों हैं। वहीं, टेलीविजन में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी और रेडियो/ट्रांजिस्टर में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। 10 में से 1 से भी कम घरों में कंप्यूटर/लैपटॉप था, जिसमें से केवल 3 प्रतिशत के पास इंटरनेट था। शहरी इलाकों में इंटरनेट की मौजूदगी 8 प्रतिशत, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 1 प्रतिशत से भी कम थी। वहीं, 63 प्रतिशत घरों में टेलीफोन/मोबाइल थे। इनमें से शहरी क्षेत्र में 82 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 54 प्रतिशत थे। बिजनेस और डेटा कंसल्टेंट का कहना है कि खासतौर पर स्मार्टफोन की संख्या पता चलने से पॉलिसी मेकर्स को काफी सहूलियत होगी। इससे यह समझा जा सकेगा कि भारत में कंज्यूमर बिहेवियर किस तरह से बदल रहा है।


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